Realty of indian media -2021

 पूरे विश्व में हमारी इंडियन मीडिया 142 रैंक में स्टैंड करती है आउट ऑफ़ 180 इसका सीधा मतलब ये है कि 141 देशों को मीडिया हमारे देश से बेहतर है और अच्छा काम कर रही है 

अब वो क्यों बेहतर है इसके बारे में बात करते है ।

दूसरे देशों में सोशल मीडिया में झूठ बोला जाता है और मेन स्ट्रीम मीडिया क्लियर करती है पर हमारे देश मे तो बिल्कुल उल्टा ही है यहां मेन स्ट्रीम मीडिया झूठ बोलती है फिर उसे सोशल मीडिया में क्लियर किया जाता है ।

जब भी कोई घटना होती है तो एक जर्नलिस्ट का काम होता है कि बिना अपनी राय रखे हुए सारी की सारी जानकारी लोगो तक पहुंचाए फिर ये लोगो के ऊपर है क्या मानना है और क्या नहीं पर इंडियन मीडिया सच्चाई के सिवा सबकुछ दिखा देती है वो बेगुनाह को अपराधी और अपराधी को बेगुनाह भी साबित कर देते हैं 

और इंडियन एंकर्स एंकर कम एक्टर ज्यादा है जो सिर्फ एक्टिंग करना जानते है 

और ऐसा नहीं है कि सारे न्यूज चैनल अगल अगल काम  करते हैं  सारे न्यूज चैनल एक सा ही करते है बस इंसब ने गुट अलग अलग पकड़ रखा है 

महात्मा गांधी घर घर नहीं गए थे अपने विचार बताने जब वो जेल में भी थे तो उन्होंने न्यूज पेपर के ज़रिए अपनी बात लोगो तक पहुंचाई इसी वजह से इंडियन मीडिया को 4th पिलर ऑफ़ डेमोक्रेसी बोला जाता है 

अगर आजका मीडिया पहले होता तो अंग्रेज़ उसे खरीद लेते और मीडिया हमलोगो को ये यकीन दिला देती की ईस्ट इंडिया कंपनी कितनी लाबकारी है हम लोगो के लिए

रूलिंग सरकार का जो मेन विरोधी होता है वो मीडिया होता है और ये सरकार को भी अच्छे से पता  है कि इससे डील कैसे करना है मीडिया में कूड़ा कबाड़ भर दीजिए जनता उसी में उलझी रहेगी और फिर सरकार अपना काम आराम से करती रहती है

जो रीयल जर्नलिज्म होता है उसमे काफी मेहनत लगती है पूरी प्लांनिंग करनी पड़ती है बाहर जाके ग्राउंड रिपोर्टिंग करनी पड़ती है लोगो से जुड़ना पड़ता है अलग अलग जगह जाना पड़ता है काफी कुछ , अब इतनी मेहनत के बजाए ये एंकर जो एंकर कम और एक्टर ज्यादा है इनके पास नालेज कम और एक्टिंग ज्यादा है अब ये ढूंढते है नया रास्ता , अब ये करते क्या है ये 4 लोगो को पकड़ कर लाते है और उनसे डिबेट कराते है और आप नोटिस करोगे जो लोग ज्यादा हल्ला करेंगे विवाद पैदा करेंगे उल्टे सीधे शब्द बोलेंगे मुंह से जगह उगलेंगे चेखेंगे चिल्लायगे बस उन्ही लोगो को ये बार बार बुलाते है और उन्हें सिर्फ बुलाकर ये विवाद वाली चीजे ही बुलवाते है । आप देखना एक भी ढंग का पढ़ा लिखा आदमी ये डिबेट में न बुलाते

ये जो डिबेट करवाते है उसमे 95% टॉपिक जो होंगे वो किसी मतलब के ना होते है 

जैसे -

पाकिस्तान पे डिबेट कराते है 

चीन पे डिबेट कराते है 

बीजेपी अच्छी है कांग्रेस खराब है 

हिन्दू  मुस्लिम 

राम मंदिर 

मोदी राज 


इनको डिबेट करनी किस टॉपिक  में चाहिए 

सरकार की  नितिया 

बेजोरगारी 

किसान

विकास 

प्रदूषण 

ब्रस्टाचार 

भविष्य में आने वाले बदलाव 

स्वास्थ विभाग में 

ऐसे टॉपिक जिससे देश का विकास हो लोगो तक सही जानकारी पहुचे ।


यहां तक तो फिर भी सही है कहीं आप इनके टाइटल  देखो एक  से एक ग़ज़ब टीवी सिरिएल मे क्या होंगे 

#ये pok वापस दे दे इमरान (आज तक)

# मेरे राम vs तेरे राम (जी न्यूज)

#मोदी का प्रन - पाकिस्तान का चीर हरण(न्यूज 18 इंडिया)

#विपक्ष पड़ा है चक्कर में कोई नहीं है टक्कर में (आज तक ) 

#जब तक तोड़ेंगे नहीं तब तक छोड़ेंगे नहीं (न्यूज 18 इंडिया)

#मोदी के 100 दिन vs विपक्ष के बुरे दिन(न्यूज १८)

# मंगल भवन अमंगल हारी राम मंदिर की करो तयारी ।


और सारे न्यूज चैनल ये सब कुछ करते है सिर्फ टीआरपी के लिए ।

मतलब टेलीविजन रेटिंग प्वाइंट 

जिसकी जितनी ज्यादा टीआरपी उसको उतने ज्यादा और महंगे एड और उतनी ज्यादा कमाई ।


रिपब्लिक भारत जो इस समय सबसे ज्यादा टीआरपी में है उसके हेड अर्णव गोस्वामी जो 80-85% के मालिक है करीब 1200 करोड़ में 85% अकेले मालिक है और रात दिन बस इसी की वकालत करते है कि जाती वाद और परिवार वाद और उन्होंने खुद अपनी पत्नी को अपने चैनल का एडिटर हेड बना रखा है जबकि उन्हें तो उसी को इस पोस्ट में रखना चाहिए जो बहुत ज्यादा काबिल हो उस पोस्ट के लिए ।

ऐसा नहीं है न्यूज चैनल वाले कुछ भी बोलते है ये बहुत सोच समझ कर बोलते है और ये जानते है कि क्या बोलने से लोग इन्हें सुनेगे और कैसे ये पैसा कमायगे।

सरकार भी इनकी ग्राहक है और कोई अपने ग्राहक को नाराज नहीं करता ये इन सब न्यूज चैनल वालों को बहुत ही अच्छे तरीके से पता है ऐसा नही हैं की पैसा सिर्फ उन्हीं पार्टी के पास हैं जो सत्ता मे हैं  पैसा उन पार्टियों के पास भी है जो हारी है 

पैसा सभी पार्टी के पास है पर ये ज्यादा तवज्जो उसी को देते है जो पार्टी सत्ता में है।

ऐसा नहीं है कि पुरानी सरकार अच्छी थी या इस सरकार में ऐसा होने लगा है कोई नई सरकार आयगी तो ये सही हो जाएगा ।

सरकार चाहे जो भी रहे ना ये सुधरा था ना सुधरा है और ना ही आने वाले समय में सुधरेगा 

क्युकी सरकार कोई भी आए ये कोई सरकार नहीं चाहेगी की मीडिया को लेके कोई कड़े कानून बनाए जाए या इसमें झूठ फरेब बन्द हो इसका एक ही उपाय हैं ऐसे न्यूज़ चैनल को देखना ही बंद करदे ना इन्हें फ़ॉलो करे और ना ही इसका इस्तमाल करे ।

धन्यवाद मिलेंगे फिर किसी नए ब्लॉग में ।

  

          कितने दिलो को तोड़ती है ये कम्बख्त फरवरी 

         यूं तो ना किसी ने इसके दिन घटाए है ।



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